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6 महीने का बचà¥à¤šà¥‡ का वजन कैसे बढ़ाà¤à¤‚?
जनà¥à¤® के छह माह बाद बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को कई जरूरी पोषक ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ की आवशà¥à¤¯à¤•ता होती है, जो सिरà¥à¤« दूध पर निरà¥à¤à¤° रहने से नहीं मिल पाते। इसलिà¤, डॉकà¥à¤Ÿà¤° छह माह से बड़े बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को दूध के अलावा अनाज, दाल, सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¤¾à¤‚, फल और घर में बने सीरियलà¥à¤¸ खिलाने की सलाह देते हैं।
6 से 8 माह के बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के आहार में आप सà¥à¤®à¥‚दी को शामिल कर सकते हैं, ताकि उसकी आंतों पर जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ जोर न आठऔर वह इन खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ को आसानी से हजम कर सके। धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखने वाली बात यह है कि 6 से 8 माह के बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के आहार में फल पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¦à¤¿à¤¨ 30 गà¥à¤°à¤¾à¤® और सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¦à¤¿à¤¨ 480 गà¥à¤°à¤¾à¤® से अधिक नहीं शामिल करनी चाहिà¤à¤‚। वहीं, 8 माह से बड़े बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को आप नरम और मà¥à¤²à¤¾à¤¯à¤® आहार सीधे खाने के लिठदे सकते हैं, ताकि वह खà¥à¤¦ से खाना सीखें और à¤à¥‹à¤œà¤¨ के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ उनमें रà¥à¤à¤¾à¤¨ बà¥à¥‡à¥¤
अगर आप à¤à¥€ अपने बचà¥à¤šà¥‡ के वजन को लेकर परेशान हैं, तो हम आपको कà¥à¤› à¤à¤¸à¥‡ खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ के बारे में बता रहे हैं, जिनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ आप अपने बचà¥à¤šà¥‡ के आहार में शामिल कर सकते हैं।
1. सेहत से à¤à¤°à¤ªà¥‚र है केला
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ का वजन बà¥à¤¾à¤¨à¥‡ के लिठकेले को à¤à¤• बेहतरीन विकलà¥à¤ª माना गया है। यह à¤à¤¨à¤°à¥à¤œà¥€, कारà¥à¤¬à¥‹à¤¹à¤¾à¤‡à¤¡à¥à¤°à¥‡à¤Ÿ और फैट का अचà¥à¤›à¤¾ सà¥à¤°à¥‹à¤¤ होता है। इन तीनों ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ की मौजूदगी इसे वजन बà¥à¤¾à¤¨à¥‡ का à¤à¤• उतà¥à¤¤à¤® आहार बनाती है। इसके अलावा, इसमें पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ और फाइबर के साथ कई जरूरी मिनरल और विटामिन à¤à¥€ मौजूद रहते हैं, जो बचà¥à¤šà¥‡ के विकास में अहम à¤à¥‚मिका निà¤à¤¾à¤¤à¥‡ हैं । खास यह है कि आप इसे बचà¥à¤šà¥‡ के आहार में बड़ी आसानी से शामिल कर सकते हैं। सीधा इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² के साथ-साथ इसे सà¥à¤®à¥‚दी, शेक, केक या पà¥à¤¡à¤¿à¤‚ग बनाकर à¤à¥€ बचà¥à¤šà¥‡ को दिया जा सकता है।
2. वजन बà¥à¤¾à¤¨à¥‡ में मददगार है रागी
कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤® व आयरन के साथ फाइबर, पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ और विटामिन à¤à¥€ बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के विकास के लिठजरूरी हैं। इसके अलावा, à¤à¤¨à¤°à¥à¤œà¥€, कारà¥à¤¬à¥‹à¤¹à¤¾à¤‡à¤¡à¥à¤°à¥‡à¤Ÿ और फैट à¤à¥€ वजन बà¥à¤¾à¤¨à¥‡ में सहायक हो सकते हैं । पोषक ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ से à¤à¤°à¤ªà¥‚र रागी आसानी से पच जाती है, इसलिठचिकितà¥à¤¸à¤• à¤à¥€ इसे बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के आहार में शामिल करने की सलाह देते हैं। बचà¥à¤šà¥‡ को खिलाने के लिठआप इसे हलवे या खिचड़ी में शामिल कर सकते हैं।
3. दही देता है जरूरी पोषण
विटामिन à¤, बी, सी, डी, ई, फोलेट और नियासिन के साथ कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤®, आयरन, पोटैशियम और मैगà¥à¤¨à¥€à¤¶à¤¿à¤¯à¤® जैसे कई अनà¥à¤¯ पोषक ततà¥à¤µ दही में मौजूद होते हैं। वहीं, कम फैट के साथ अचà¥à¤›à¥€ मातà¥à¤°à¤¾ में ऊरà¥à¤œà¤¾ और पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ à¤à¥€ इसमें पाया जाता है। इस कारण इसे बचà¥à¤šà¥‡ का वजन बà¥à¤¾à¤¨à¥‡ के लिठसहायक माना जा सकता है।
4. ओटà¥à¤¸ से बà¥à¤¾à¤à¤‚ बचà¥à¤šà¥‡ का वजन
जहां इसमें मौजूद à¤à¤¨à¤°à¥à¤œà¥€, फैट और कारà¥à¤¬à¥‹à¤¹à¤¾à¤‡à¤¡à¥à¤°à¥‡à¤Ÿ मिशà¥à¤°à¤¿à¤¤ रूप से बचà¥à¤šà¥‡ का वजन बà¥à¤¾à¤¨à¥‡ में सहायक होते हैं, वहीं इसमें विटामिन बी-6, फोलेट, राइबोफà¥à¤²à¥‡à¤µà¤¿à¤¨, थियामिन और नियासिन के साथ पोटैशियम, फासà¥à¤«à¥‹à¤°à¤¸, मैगà¥à¤¨à¥€à¤¶à¤¿à¤¯à¤® और कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤® की मौजूदगी बचà¥à¤šà¥‡ के विकास में सहयोग करती है।
5. आलू बनाठतंदà¥à¤°à¥à¤¸à¥à¤¤
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ का वजन बà¥à¤¾à¤¨à¥‡ के लिठआप आलू को à¤à¥€ इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² में ला सकती हैं। इसमें à¤à¤¨à¤°à¥à¤œà¥€ व कारà¥à¤¬à¥‹à¤¹à¤¾à¤‡à¤¡à¥à¤°à¥‡à¤Ÿ के साथ कà¥à¤› मातà¥à¤°à¤¾ में फैट à¤à¥€ उपलबà¥à¤§ होता है, जो वजन बà¥à¤¾à¤¨à¥‡ में कारगर माना जाता है। इसके अलावा, कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤®, मैगà¥à¤¨à¥€à¤¶à¤¿à¤¯à¤®, आयरन, फासà¥à¤«à¥‹à¤°à¤¸ और पोटैशियम के साथ इसमें विटामिन बी-6, सी, राइबोफà¥à¤²à¥‡à¤µà¤¿à¤¨, थियामिन, नियासिन और फोलेट à¤à¥€ मौजूद होते हैं, जो बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के पोषण में सकारातà¥à¤®à¤• परिणाम देते हैं। बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के आहार में शामिल करने के लिठआप आलू का à¤à¤°à¤¤à¤¾ बनाकर या उसे उबालकर दूध में मैश करके à¤à¥€ दे सकते हैं। दाल, सबà¥à¤œà¥€ या खिचड़ी के साथ à¤à¥€ इसे इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² में लाया जा सकता है ।
6. शकà¥à¤•रकंद से बनाà¤à¤‚ बचà¥à¤šà¥‡ की सेहत
आलू की ही तरह शकà¥à¤•रकंद को à¤à¥€ बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के आहार में शामिल करना बेहत आसान है। आप इसे उबाल कर बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को सीधा खाने के लिठदे सकते हैं। अगर आप चाहे तो दूध के साथ मैश करके à¤à¥€ इसे बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को दे सकते हैं। à¤à¤¨à¤°à¥à¤œà¥€ और कारà¥à¤¬à¥‹à¤¹à¤¾à¤‡à¤¡à¥à¤°à¥‡à¤Ÿ का अचà¥à¤›à¤¾ सà¥à¤°à¥‹à¤¤ होने के कारण इसे बचà¥à¤šà¥‡ का वजन बà¥à¤¾à¤¨à¥‡ के लिठउपयोग में लाया जा सकता है। वहीं, कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤®, पोटैशियम, आयरन और मैगà¥à¤¨à¥€à¤¶à¤¿à¤¯à¤® के साथ विटामिन-सी, नियासिन व फोलेट और अनà¥à¤¯ कई जरूरी विटामिन और पोषक ततà¥à¤µ à¤à¥€ इसमें à¤à¤°à¤ªà¥‚र मातà¥à¤°à¤¾ में उपलबà¥à¤§ रहते हैं, जो बचà¥à¤šà¥‡ के विकास में लाà¤à¤•ारी माने जाते हैं।
7. दालें हैं पोषण का खजाना
दालें पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ का अचà¥à¤›à¤¾ सà¥à¤°à¥‹à¤¤ मानी जाती हैं। साथ ही इसमें आयरन, मैगà¥à¤¨à¥€à¤¶à¤¿à¤¯à¤®, जिंक और फोलेट जैसे मिनरल और कई जरूरी विटामिन पाठजाते हैं। पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ मांसपेशियों को मजबूती पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ करता है और मिनरल व विटामिन बचà¥à¤šà¥‡ के विकास में पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¥€ सहयोग पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ करते हैं। इस कारण यह कहा जा सकता है कि दालों को बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के आहार में शामिल करने से उनके बेहतर विकास में मदद मिल सकती है।
8. à¤à¤µà¥‹à¤•ाडो से दें जरूरी पोषण
जैसा कि हमने आपको लेख में पहले à¤à¥€ बताया है कि बचà¥à¤šà¥‡ का वजन बà¥à¤¾à¤¨à¥‡ के लिठउपयोग में लाठजाने वाले खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ में फैट, कारà¥à¤¬à¥‹à¤¹à¤¾à¤‡à¤¡à¥à¤°à¥‡à¤Ÿ और वसा का संयोजन लाà¤à¤•ारी परिणाम देता है। ठीक वैसे ही à¤à¤µà¥‹à¤•ाडो में à¤à¥€ इन तीनों के साथ मिनरलà¥à¤¸ और विटामिन à¤à¤°à¤ªà¥‚र मातà¥à¤°à¤¾ में उपलबà¥à¤§ होते हैं, जो बचà¥à¤šà¥‡ के विकास में सहायक माने जाते हैं । 6 से 9 महीने तक के बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को इसकी पà¥à¤¯à¥‚री बनाकर दी जा सकती है। वहीं, 9 महीने से बड़े बचà¥à¤šà¥‡ को इसे मैश करके खिलाया जा सकता है।
9. अंडा है वजन बà¥à¤¾à¤¨à¥‡ में मददगार
अंडा फैट, कारà¥à¤¬à¥‹à¤¹à¤¾à¤‡à¤¡à¥à¤°à¥‡à¤Ÿ और à¤à¤¨à¤°à¥à¤œà¥€ के साथ मिनरल और विटामिन का अचà¥à¤›à¤¾ सà¥à¤°à¥‹à¤¤ होता है। इस कारण इसे बचà¥à¤šà¥‡ के आहार में शामिल करना काफी लाà¤à¤•ारी सिदà¥à¤§ हो सकता है। इससे बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ का वजन तो बà¥à¤¤à¤¾ ही है, साथ ही यह बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को अनà¥à¤¯ जरूरी पोषक ततà¥à¤µ à¤à¥€ पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ करता है । धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ देने वाली बात यह है कि कà¥à¤› बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में इसके कारण à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ à¤à¥€ हो सकती है। इसलिà¤, à¤à¤• बार अंडा देने के बाद आप तीन दिन तक इसके पड़ने वाले पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ को अचà¥à¤›à¥‡ से परख लें। उसके बाद ही इसे बचà¥à¤šà¥‡ के नियमित आहार में शामिल करें। अगर à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¤¿à¤• पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ दिखाई दें, तो डॉकà¥à¤Ÿà¤° से तà¥à¤°à¤‚त सलाह लें।
10. पनीर का उपयोग है लाà¤à¤•ारी
पनीर कम वसा वाला à¤à¤¨à¤°à¥à¤œà¥€ का अचà¥à¤›à¤¾ सà¥à¤°à¥‹à¤¤ है। इसमें कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤®, फासà¥à¤«à¥‹à¤°à¤¸, पोटेशियम और सोडियम के साथ अधिकतर विटामिन थोड़ी-थोड़ी मातà¥à¤°à¤¾ में उपलबà¥à¤§ होते हैं। इस कारण यह बचà¥à¤šà¥‡ का वजन बà¥à¤¾à¤¨à¥‡ में सहायक माना जा सकता है। पनीर के छोटे-छोटे टà¥à¤•ड़े काटकर बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को खाने के लिठदिठजा सकते हैं, लेकिन इसके इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² में à¤à¥€ आपको तीन दिन के लिठà¤à¤²à¤°à¥à¤œà¤¿à¤• रिà¤à¤•à¥à¤¶à¤¨ वाला नियम पालन करने की आवशà¥à¤¯à¤•ता है। कà¥à¤› बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में इसका उपयोग à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ पैदा कर सकता है।
11. डà¥à¤°à¤¾à¤ˆ फà¥à¤°à¥‚टà¥à¤¸ से बढ़ेगा बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ का वजन
वजन बà¥à¤¾à¤¨à¥‡ के लिठबचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के आहार में डà¥à¤°à¤¾à¤ˆ फà¥à¤°à¥‚टà¥à¤¸ शामिल करना à¤à¤• उतà¥à¤¤à¤® विकलà¥à¤ª साबित हो सकता है। दरअसल, इनमें à¤à¤¨à¤°à¥à¤œà¥€ à¤à¤°à¤ªà¥‚र मातà¥à¤°à¤¾ में पाई जाती है, जो वजन बà¥à¤¾à¤¨à¥‡ में सहायक होती है । बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को आप इसकी पà¥à¤¯à¥‹à¤°à¥€ या सà¥à¤®à¥‚दी बनाकर दे सकते हैं।
12. फà¥à¤°à¥‚ट जूस है सहायक
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के आहार में फà¥à¤°à¥‚ट जूस को शामिल करना à¤à¥€ वजन बà¥à¤¾à¤¨à¥‡ में आपकी मदद कर सकता है। इनमें à¤à¤¨à¤°à¥à¤œà¥€, कारà¥à¤¬à¥‹à¤¹à¤¾à¤‡à¤¡à¥à¤°à¥‡à¤Ÿ और शà¥à¤—र की आवशà¥à¤¯à¤• मातà¥à¤°à¤¾ पाई जाती है। वहीं, इसे मिनरल और विटामिन का à¤à¥€ अचà¥à¤›à¤¾ सà¥à¤°à¥‹à¤¤ माना जाता है, जो बचà¥à¤šà¥‡ का वजन बà¥à¤¾à¤¨à¥‡ के साथ-साथ उनके पोषण में à¤à¥€ मदद कर सकता है । आप 9 माह से बड़े बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को गूदेदार फल सीधे खाने के लिठà¤à¥€ दे सकते हैं।
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